Nội dung text Chapter 13 बच्चे काम पर जा रहे हैं.pdf
हिन्दी अध्याय-13: बच्चेकाम पर जा रिेिैं
(1) 13 बच्चेकाम पर जा रिेिैं -राजेश जोशी साराांश इस कविता मेंबच्चों सेबचपन छीन लिए जानेकी पीडा व्यक्त हुई है। कवि नेउस सामालजक – आर्थिक विडंबना की ओर इशारा ककया हैलजसमेंकु छ बच्चेखेि, लशक्षा और जीिन की उमंग से िंचचत हैं। कवि कहता हैकक बच्चों का काम पर जाना आज के ज़मानेमेंबडी भयानक बात है। यह उनके खेिने-कू दनेऔर पढ़ने-लिखनेके कदन हैं। किर भी िेकाम करनेको मजबूर हैं। उनके विकास के लिए सभी चीज़ों के रहतेहुए भी उनका काम पर जाना ककतनी भयानक बात है। अपनी कविता के माध्यम सेिह समाज को जागृत करना चाहतेहैंताकक बच्चों के बचपन को काम की भट्टी मेंझौंकनेसेरोका जा सके । बच्चेकाम पर जा रिेिैंका भावार्थ काव्ाांश 1. कोिरेसेढँकी सड़क पर बच्चेकाम पर जा रिेिैं सुबि सुबि बच्चेकाम पर जा रिेिैं िमारेसमय की सबसेभयानक पांक्ति िैयि भयानक िैइसेवववरण की तरि लिखा जाना लिखा जाना चाहिए इसेसवाि की तरि काम पर क्यों जा रिेिैंबच्चे? भावार्थ–
(2) 13 बच्चेकाम पर जा रिेिैं उपरोक्त पंक्तक्तयों मेंकवि कहतेहैंकक सुबह-सुबह की कडाके की ठंड में, जब पूरी सडक कोहरेसे ढकी है। उस समय बच्चेकाम पर जा रहेहैं। मजदूरी करनेके लिए या रोजी-रोटी कमानेके लिए घर सेननकि कर, िो इस भयानक ठंड मेंकाम पर जा रहेहैं। कवि आगेकहतेहैंकक बच्चेकाम पर जा रहेहैं। यह हमारेसमय की सबसेभयानक पंक्तक्त है अिाात लजस उम्र मेंबच्चों को खेिना-कू दना चाहहए, स्कू ि जाना चाहहए, मौज मस्ती करनी चाहहए। उस समय िो इतनी बडी लजम्मेदारी भरा काम कर रहेहैं। अपनेगरीब मां-बाप की लजम्मेदाररयां बांटनेके लिए, अपनेघर की आर्थिक स्थिनत सुधारनेके लिए अपना बचपन कु बाान कर रहेहैं। और िो ऐसा करनेके लिए वििश है, मजबूर हैं। इससेज्यादा और क्या भयानक होगा। अगिी पंक्तक्तयों मेंबच्चों को काम पर जाता देखकर कवि का मन बहुत दखु ी है, व्यचित हैं। िो कहतेहैंकक “बच्चेकाम पर क्यों जा रहेहैं”, इसेएक गंभीर प्रश्न की तरह हमेंअपनी लजम्मेदार सरकार सेपूछना चाहहए, समाज के तिाकचित ठेके दारों सेपूछना चाहहए।बजाय इसेएक वििरण की तरह लिखनेके । यानन कागजों मेंआंकडेइकठ्ठेकरनेसेकु छ भी हाससि नही ंहोगा। हमेंयह बात पूछनी चाहहए कक ऐसी क्या स्थिनतयां बन गई कक छोटे-छोटेबच्चों को पढ़नेलिखने, खेिनेकू दनेकी उम्र मेंकाम पर जाना पड रहा है। अपनेघर की लजम्मेदाररयों मेंहाि बटााँना पडा है। स्कू ि जाना छोड कर, मजदरूी करनेजाना पड रहा है। आखखर क्यों उनसेउनका बचपन इस बेरहमी सेछीना जा रहा है। काव्ाांश 2. क्या अांतररक्ष मेंगिर िई िैंसारी िेंदें क्या दीमकों नेखा लिया िै सारी रांि वबरांिी ककताबों को क्या कािेपिाड़ के ननचेदब िए िैंसारेखखिौने क्या ककसी भूकां प मेंढि िई िैं सारेमदरसों की इमारतें
(3) 13 बच्चेकाम पर जा रिेिैं क्या सारेमैदान, सारेबिीचेऔर घरों के आँिन ख़त्म िो िए िैंएकाएक भावार्थ– उपरोक्त पंक्तक्तयों मेंकवि कहतेहैंकक आखखर ऐसा क्या हो गया हैकक बच्चों को काम पर जाना पडा है।यहां पर कवि एक साि कई सारेसिाि करतेहैं। िो कहतेहैंकक क्या बच्चों के खेिनेिािी सारी गेंदेंअंतररक्ष मेंचगर गयी हैंया किर उनकी रंग-नबरंगी काटटान िािी सारी कहाननयां की ककताबें दीमकों नेखा िी है। क्या बच्चों के सारेखखिौनेककसी कािेपहाड के नीचेदब गए हैंया किर सारेस्कू िों के भिन ककसी भूकं प की िजह सेचगर गयेहैं। यानी सारेस्कू ि खत्म हो चुके हैं। कवि आगेऔर सिाि करतेहैंकक िो सारेखेि के मैदान, जहां बच्चेकदनभर खूब खेितेहैं। िो सारेबाग-बगीचेलजनमेंबच्चेदौड-दौड कर नततलियों पकडतेहैंया िि-िू ि खानेके लिए घूमते किरतेहैं। और घरों के िो आंगन, जहां बच्चेकदनभर धमाचौकडी करतेरहतेहैं। िो कहााँगये। क्या िह सब खत्म हो गए हैं? लजस िजह सेइन बच्चों को अब काम पर जाना पड रहा है। कवि पूछतेहैंकक आखखर क्यों इन बच्चों को काम पर जाना पड रहा है। काव्ाांश 3. तो किर बचा िी क्या िैइस दनुनया में? ककतना भयानक िोता अिर ऐसा िोता भयानक िैिेककन इससेभी ज़्यादा यि कक िैंसारी ची ांजेिस्बमामूि पर दनुनया की िजारों सड़कों सेिुजरतेहुए बच्चे, बहुत छोटेछोटेबच्चे