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Nội dung text Chapter 12 अब कहाँ दुसरे के दुख से दुखी होने वाले.pdf

हिन्दी अध्याय-12: अब कहााँदसू रों के दुः ख से दख ी होनेवाले
(1) 12 अब कहााँदसू रों के दुः ख सेदख ी होनेवाले ननदा फ़ाज़ली साराांश इस पाठ में लेखक ने मानव द्वारों अपने स्वार्थ के ललए ककये गए धरती पर ककये गए अत्याचारों से अवगत कराया है। पाठ में बताया गया है की ककस तरह मानव की न ममटने वाली भूख ने धरती के तमाम जीव-जन्तुओं के सार् खुद के ललए भी मुसीबत खड़ी कर दी है। ईसा से 1025 वर्थ पहले एक बादशाह र्े लजनका नाम बाइबबल के अनुसार सोलोमेन र्ा, उन्हें कु रआन में सुलेमान कहा गया है। वह ससर्थ मानव जाबत के ही राजा नहीं र्े बल्कि सभी छोटे-बड़े पशु-पक्षी के भी राजा र्े। वह इन सबकी भार्ा जानते र्े। एक बार वे अपने लश्कर के सार् रास्ते से गुजर रहे र्े। उस रास्ते में कु छ चीटटयााँ घोड़ों की टापों की आवाज़ें सुनकर अपने बबलों की तरर् वापस चल पड़ीं। इसपर सुलेमान ने उनसे घबराने को न कहते हुए कहा कक खुदा ने उन्हें सबका रखवाला बनाया है। वेमुसीबत नहीं हैंबल्कि सबके ललए मुहब्बत हैं। चीटटयों नेउनके ललए दआु की और वे आगे बढ़ चलें। ऐसी एक घटना का लजक्र करते हुए ससिंधी भार्ा के महाकवव शेख अयाज़ ने अपनी आत्मकर्ा में ललखा है कक एक कदन उनके पपता कु एाँ से नहाकर घर लौटे तो मााँ ने भोजन परोसा। जब उन्होंने रोटी का एक कौर तोड़ा तभी उन्हें अपनी बाजू पर एक काला च्योंटा रेंगता कदखाई कदया। वे भोजन छोड़कर उठ खड़े हुए और पहले उस बेघर हुए च्योंटे को वापस उसके घर कु एाँ पर छोड़ आये। बाइबबल और अन्य ग्रंर्ों में नूह नामक एक पैगम्बर का लजक्र ममलता है लजनका असली नाम लशकर र्ा परन्तु अरब में इन्हें नूह नाम से याद ककया जाता है क्योंकक ये पूरी लजिंदगी रोते रहे। एक बार इनके सामने से एक घायल कु त्ता गुजरा चूाँकक इस्लाम में कु त्ते को गन्दा माना जाता है इसललए इन्होनेंउसेगंदेकुत्तेदूर हो जा कहा। कुत्तेनेइस दत्कु ार को सुनकर जवाब कदया कक ना मैं अपनी मज़ीी से कु त्ता हाँ और ना तुम अपनी पसंद से इंसान हो। बनाने वाला सब एक ही है। इन बातों को सुनकर वेदखु ी हो गए और सारी उम्र रोतेरहे। महाभारत मेंभी एक कुत्तेनेयुमधष्ठिर का सार् अंत तक कदया र्ा। भले ही इस संसार की रचना की अलग-अलग कहाबनयााँ हों परन्तु इतना तय है की धरती ककसी एक की नहीं है। सभी जीव-जंतुओं, पशु, नदी पहाड़ सबका इसपर सामान अमधकार है। मानव इस बात को नहीं समझता। पहलेउसनेसंसार जैसेपररवार को तोड़ा कर्र खुद टुकड़ों मेंबटाँकर एक- दूसरेसेदूर हो चुका है। पहलेलोग ममलजुलकर बड़े-बड़े दालानों-आंगनों में रहते र्े पर अब छोटे-
(2) 12 अब कहााँदसू रों के दुः ख सेदख ी होनेवाले छोटे किब्बे जैसे घरों में ससमटने लगे हैं। बढ़ती हुई आबादी के कारण समंदर को पीछे सरकाना पड़ रहा है, पेड़ों को रास्तेसेहटाना पड़ रहा हैलजस कारण र्ैलेप्रदूर्ण नेपलक्षयों को भागना शुरू कर कदया है। नेचर की भी सहनशक्ति होती है। इसके गुस्से का नमूना हम कई बार अत्यमधक गमीी, जलजले, सैलाब आकद के रूप में देख रहे हैं। लेखक की मााँ कहती र्ीं की शाम ढलने पर पेड़ से पत्ते मत तोड़ो, वे रोयेंगे। दीया-बत्ती के वक़्त र्ू ल मत तोड़ो। दररया पर जाओ तो सलाम करो कबूतरों को मत सताया करो और मुगे को परेशान मत करो वह अज़ान देता है। लेखक बताते हैं उनका ग्वाललयर में मकान र्ा। उस मकान के दालान के रोशनदान में कबूतर के एक जोड़े ने अपना घोंसला बना ललया। एक बबल्ली ने उचककर दो में सेएक अंिा र्ोड़ कदया। लेखक की मााँसेदूसरा अंिा बचानेके क्रम मेंर्ूट गया। इसकी माफ़ी के ललए उन्होंने कदन भर कु छ नहीं खाया और नमाज़ अदा करती रहीं। अब लेखक मुंबई के वसोवा मेंरहतेहैं। पहलेयहााँपेड़, पररिंदेऔर दूसरेजानवर रहतेर्ेपरन्तुअब यह शहर बन चुका है। दूसरेपशु-पक्षी इसे छोड़े कर जा चुके हैं, जो नहीं गए वे इधर-उधर िेरा िाले रहतेहैं। लेखक के फ्लैट में भी दो कबूतरों ने एक मचान पर अपना घोंसला बनाया, बच्चे अभी छोटे र्े। खखलाने-पपलाने की लजम्मेदारी बड़े कबूतरों पर र्ीं। वे कदन-भर आते जाते रहते र्े। लेखक और उनकी पत्नी को इससे परेशानी होती इसललए उन्होंने जाली लगाकर उन्हें बाहर कर कदया। अब दोनों कबूतर खखड़की के बाहर बैठे उदास रहते हैं परन्तु अब ना सुलेमान हैं न लेखक की मााँ लजन्हें इनकी कफ़क्र हो।
(3) 12 अब कहााँदसू रों के दुः ख सेदख ी होनेवाले NCERT SOLUTIONS मौखखक प्रश्न (पृष्ठ सांख्या 114) प्रश्न 1 बनम्नललखखत प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीलजए- a. बड़े-बड़े बबल्डर समुद्र को पीछे क्यों धके ल रहे र्े? b. लेखक का घर ककस शहर में र्ा? c. जीवन कै से घरों में ससमटने लगी है? d. कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों र्ड़र्ड़ा रहे र्े? उत्तर- a. बड़े-बड़े बबल्डर समुद्र को इसललए धके ल रहे र्े कक ताकक वे समुद्र के ककनारे की जमीन पर कब्जा कर सकें और उस पर बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ीकर लोगों को बसा सकें । ऐसा करके वे पैसा कमाना चाहते र्े। b. लेखक का घर पहले ग्वाललयर में र्ा परंतु बाद में वह मुंबई के वसाथवा में रहने लगा। c. पहले जनसंख्या कम र्ी। लोगों के टहस्से में जमीन अमधक र्ी। वे बड़े-बड़े घरों और खुले में रहते र्े। घर की तरह ही उनका कदल भी बड़ा हुआ करता र्ा, परंतु जनसंख्या बढ़ने के सार् ही वे छोटे-छोटे घरों में रहने को वववश हो गए। d. कबूतर के जोड़े ने रोशनदान में दो अंिे कदए र्े। उनमें से एक को बबल्ली ने र्ोड़ कदया और दूसरा साँभाल कर रखतेहुए मााँसेर्ूट गया। अपनेअंिेर्ूटनेसेदखी होने से कबूतर र्ड़र्ड़ा ु रहे र्े। ललखखत प्रश्न (पृष्ठ सांख्या 114-115) प्रश्न 2 बनम्नललखखत प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) ललखखए- a. अरब में लशकर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं? b. लेखक की मााँ ककस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के ललए मना करती र्ीं और क्यों? c. प्रकृ बत में आए असंतुलन को क्या पररणाम हुआ? d. प्रकृबत मेंआए असंतुलन का दष्पु ररणाम बहुत ही भयंकर हुआ; जैसे-
(4) 12 अब कहााँदसू रों के दुः ख सेदख ी होनेवाले • ववनाशकारी समुद्री तूफ़ाने आने लगे। • अत्यमधक गरमी पड़ने लगी। • असमय बरसातें होने से जन-धन और फ़सलें क्षबतग्रस्त होने लगीं। • आमधयााँ और तूफ़ान आने लगीं। • नए-नए रोग उत्पन्न हो गए, लजससे पशु-पक्षी असमय मरने लगे। e. लेखक ने ग्वाललयर से बंबई तक ककन बदलावों को महसूस ककया? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीलजए। f. िेरा िालने से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीलजए। g. शेख अयाज़ के पपता अपने बाजू पर काला च्योंटा रेंगता देख भोजन छोड़कर क्यों उठ खड़े हुए उत्तर- a. अरब में नूह नाम के एक पैगंबर र्े लजनका असली नाम लशकर र्ा। वे अत्यंत दयालु और संवेदनशील र्े। एक बार एक कुत्तेको उन्होंनेदत्कु ार कदया। उस कुत्तेका जवाब सुनकर वे बहुत दखु ी हुए और उम्र भर पश्चाताप करतेरहे। अपनेकरुणा भाव के कारण ही वे ‘नूह’ के नाम से याद ककए जाते हैं। b. लेखक की मााँ पशु-पलक्षयों के प्रबत ही नहीं पेड़-पौधों के प्रबत भी संवेदनशील र्ीं। वे सूरज लछपने के बाद पेड़ों के पत्ते तोड़ने से मना करती र्ी। उनका मानना र्ा कक ऐसा करने पर पेड़ों को दखु होगा और वेरोतेहुए बद्दआु देतेहैं। c. प्रकृबत मेंआए असंतुलन का दष्पु ररणाम बहुत ही भयंकर हुआ; जैसे- • ववनाशकारी समुद्री तूफ़ाने आने लगे। • अत्यमधक गरमी पड़ने लगी। • असमय बरसातें होने से जन-धन और फ़सलें क्षबतग्रस्त होने लगीं। • आमधयााँ और तूफ़ान आने लगीं। • नए-नए रोग उत्पन्न हो गए, लजससे पशु-पक्षी असमय मरने लगे। d. लेखक की मााँ धार्ममक ववचारों वाली मटहला र्ी। वे मनुष्य से ही नहीं पशु-पलक्षयों तक से प्रेम करती र्ीं। उनके घर की दालान में कबूतर ने दो अंिे कदए र्े। उनमें से एक अंिा बबल्ली

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