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हमारेसाथ जड़ु कर घर बठैेअपनी PDF शेयर कर या हमारेस्टोर सेही शेयर कर eProduct से60% तक नहस्सा पाए All Other PDF Uploaded On Our Site – learnwithkkk4.com Internal Assignment B.A. Hindi Literature Paper Code-HD-05 Paper Name - आधुलिक काव्य SECTION-A प्रश्न -1 (i) महाकाव्य की दो प्रमुख नवशेषताएँनिनखए। उत्तर - महाकाव्य में(1) विशाल कथा-विस्तार होता है, और (2) इसमेंवकसी महापरुुष केआदशशजीिन का वित्रण वकया जाता है। प्रश्न -1 (ii) 'असाध्य वीणा' नामक िम्बी कनवता की मिू सवं ेदना क्या ह?ै उत्तर - इस कविता की मूल संिेदना कला और साधना का अनोखा संबंध है, जो आत्मानुभवूत और गहन संघषशसेपणूशहोती है। प्रश्न – 1 (iii) 'मुक्त छंद केप्रवतिक कनव' नकसेकहा जाता ह?ै उत्तर - 'मक्तु छंद केप्रितशक कवि' सयूशकांत वत्रपाठी 'वनराला' को कहा जाता है। प्रश्न – 1 (iv) नकन्हीं दो िम्बी कनवताओंकेनाम निनखए। उत्तर - (1) ‘अंधायगु’ (धमशिीर भारती) (2) ‘तार सप्तक’ (संपादक - अज्ञेय) प्रश्न -1 (v) मुनक्तबोि केकाव्य-नशल्प की दो नवशेषताएँनिनखए। उत्तर - (1) जविल प्रतीकिाद एिंवबंबों का प्रयोग। (2) समाजिादी वििारधारा का स्पष्टवित्रण। प्रश्न – 1 (vi) हररवंश राय बच्चन केकाव्य की मुख्य नवशेषता क्या ह?ै उत्तर -उनकी कविता मेंछायािादी कोमलता, प्रगवतशील वििारधारा और सहज अवभव्यवक्त का अनठूा संगम वमलता है।
इसी प्रकार VMOU कोटा के बाकी के असाइनमेंट PDF तथा यनूनवनसिटी संबंनित जानकारी केनिए Contact Us - 7976526011 / 8426091137 3 SUBSCRIBE ON YOUTUBE – LEARN WITH KKK4 Section B प्रश्न 2: 'सरोज स्मनृत' का वर्णयि-नवषय क्या ह? ै इसेशोक-गीत क्यों कहा जाता ह?ै उत्तर - 'सरोज स्मवृत' महाकवि मैवथलीशरण गप्तु द्वारा रवित एक अत्यंत हृदयस्पशी कविता है, वजसमेंउन्होंनेअपनी पत्रुी सरोज की अकाल मत्ृयुपर गहन शोक व्यक्त वकया है। यह कविता व्यवक्तगत दुःुख सेउत्पन्न होकर भी समस्त मानि जावत की िेदना को प्रवतवबंवबत करती है। इस कविता का िर्णयश-विषय कवि की व्यवक्तगत पीडा, पत्रुी केप्रवत उनका स्नेह, भाग्य की कठोरता तथा जीिन-मरण का शाश्वत सत्य है। गप्तु जी नेइसमेंअपनेहृदय की गहन िेदना को बडेही मावमशक शब्दों मेंव्यक्त वकया है। उन्होंनेयह स्िीकार वकया वक मनष्ुय केहाथ मेंकुछ भी नहीं हैऔर वनयवत ही सब कुछ वनधाशररत करती है। इसेशोक-गीत इसवलए कहा जाता हैक्योंवक इसमेंकवि नेअपनी पत्रुी सरोज की असामवयक मत्ृयुपर गहन दुःुख प्रकि वकया है। यह कविता के िल शोक का प्रदशशन नहीं करती, बवकक भारतीय दशशन केअनसुार कमश, भाग्य और मत्ृयुकी अवनिायशता को भी स्पष्ट करती है। इस कविता मेंशोक और दशशन का अनठूा संयोजन देखनेको वमलता है, वजससेयह एक उत्कृष्ट शोक-गीत बन जाती है। प्रश्न 4: 'पररवतिन' कनवता की नशल्पगत नवशेषताओंको स्पष्ट कीनजए। उत्तर - 'पररितशन' कविता केमाध्यम सेकवि अज्ञेय नेजीिन मेंपररितशन की अवनिायशता को उजागर वकया है। यह कविता के िल भौवतक पररितशनों को ही नहीं, बवकक मानवसक, सामावजक और आध्यावत्मक पररितशनों को भी रेखांवकत करती है। इस कविता की वशकपगत विशेषताएँवनम्नवलवखत हैं- 1. मक्तु छंद का प्रयोग - कविता मेंकोई वनवित छंद नहीं है, बवकक यह मक्तु छंद मेंवलखी गई है। इससेभािों की अवभव्यवक्त और अवधक प्रभािशाली हो गई है। 2. प्रतीकों और वबंबों का प्रयोग - कवि नेपररितशन को स्पष्ट करनेकेवलए प्रकृवत, समय और प्रिाह केवबंबों का संदुर प्रयोग वकया है।
हमारेसाथ जड़ु कर घर बठैेअपनी PDF शेयर कर या हमारेस्टोर सेही शेयर कर eProduct से60% तक नहस्सा पाए All Other PDF Uploaded On Our Site – learnwithkkk4.com 3. दशशन और गहरी संिेदना - कविता के िल बाहरी पररितशन की बात नहीं करती, बवकक आंतररक पररितशन केमहत्ि को भी उजागर करती है। 4. सरल और प्रभािशाली भाषा - भाषा अत्यंत सहज और प्रिाहमयी है, वजससेपाठक कविता सेगहराई सेजुड जाता है। अतुः, यह कविता के िल बदलाि की अवनिायशता को नहीं दशाशती, बवकक यह प्रेररत भी करती हैवक मनष्ुय को हर पररवस्थवत में पररितशन को स्िीकार करना िावहए। प्रश्न 5: 'ब्रह्मराक्षस' कनवता का मल्ूयाकं न कीनजए। उत्तर - 'ब्रह्मराक्षस' रामधारी वसंह वदनकर द्वारा रवित एक अत्यंत प्रभािशाली कविता है, वजसमेंएक ऐसेविद्वान ब्राह्मण की कथा हैजो मत्ृयुकेबाद राक्षस बन जाता है। यह कविता समाज की विद्रूपताओंऔर बौविकता केअहकं ार पर गहरा प्रहार करती है। मलू भाि एिंवििारधारा - यह कविता एक ऐसेब्राह्मण की कहानी कहती हैजो अपनेज्ञान और विद्वत्ता केकारण अत्यंत अहकं ारी हो जाता है। मत्ृयुकेबाद िह ब्रह्मराक्षस बन जाता हैऔर समाज सेकि जाता है। यह कविता ज्ञान केसही उपयोग और मानिीय मूकयों केमहत्ि को दशाशती है। कविता का मकूयांकन - 1. समाज मेंविद्वानों की वस्थवत - वदनकर जी नेवदखाया हैवक अगर विद्वान अपनी विद्वत्ता का उपयोग समाज केवहत मेंनहीं करता, तो िह अके ला और असफल हो जाता है। 2. नीवतपरक संदशे - इस कविता मेंबताया गया हैवक के िल विद्वत्ता ही पयाशप्त नहीं है, जब तक उसमेंमानिीय संिेदनाएँऔर समाज केप्रवत उत्तरदावयत्ि न हो। 3. वशकपगत विशेषताएँ- कविता मेंगहरी संिेदना, प्रतीकों और वबंबों का प्रयोग वकया गया है। भाषा सरल और प्रभािशाली है। इस प्रकार, 'ब्रह्मराक्षस' के िल एक कविता ही नहीं, बवकक समाज और ज्ञान केसंबंधों पर एक गहन विंतन भी है।

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