PDF Google Drive Downloader v1.1


Báo lỗi sự cố

Nội dung text 7. राष्ट्रवाद.pdf

राजनीति तिज्ञान अध्याय-7: राष्ट्र िाद
(1) 07 राष्ट्रवाद राष्ट्र (Nation) शब्द की उत्पति:- राष्ट्र शब्द का अंग्रेजी भाषा में नेशन (Nation) कहते हैऔर इसका हहंदी अर्थ ” राष्ट्र ” है। नेशन शब्द लैहिन भाषा के दो शब्दों ‘ नेशशयों ‘ (natio) और नेट्स (Natus) से ननकला है, जजनका अर्थ क्रमश : है – ‘ जन्म या नस्ल ‘ और ‘ पैदा हु आ। राष्ट्रवाद क्या है:- सामान्यतः यहद जनता की राय ले तो इस विषय में राष्ट्रीय ध्िज, देश भजतत देश के शलए बशलदान जैसी बाते सु नेंगे। हदल्ली में गणतंत्र हदिस की परेड़ भारतीय राष्ट्रिाद का विचित्र प्रतीक है। राष्ट्रिाद वपछली दो शताजब्दयों के दौरान एक ऐसे सम्मोहक राजनीनतक शसद्ांत के रूप में उभरकर सामने आया है कक जजसने इनतहास रिने में महत्िप ू णथ भश ू मका अदा की है। इसने अत्यािारी शासन से आजादी हदलाने में सहायता की हैतो इसके सार् ही यह विरो्, किुता और य ुद्ों की िजह भी रहा है। राष्ट्रिाद बड़े – बडे साम्राज्यों के पतन में भागीदार रहा है। बीसिीं शताब्दी की श ु रूआत में य ूरोप में आस्रेयाई हंगेररयाई और रूसी साम्राज्य तर्ा इसके सार् एशशया और अफ्रीका में फ्रांसीसी, ब्रिहिश, डि और पतु गथ ाली साम्राज्य के बंििारे के मल ू में राष्ट्रिाद ही र्ा। इसी के सार् राष्ट्रिाद ने उन्नीसिीं शताब्दी के य ूरोप में कई छोिी – छोिी ररयासतों के एकीकरण से िहृदत्तर राष्ट्र राज्यों की स्र्ापना का मागथ हदखाया है। राष्ट्र िथा राष्ट्रवाद:- 1. राष्ट्र:- राष्ट्र के सदस्य के रूप में हम राष्ट्र के अच्कतर सदस्यों को प्रत्यक्ष तौर पर न कभी जान पाते हैऔर न ही उनके सार् िंशानग ु त संबं् जोड़ने की जरूरत पड़ती है। किर भी राष्ट्रों का िज ूद है, लोग उनमें रहते हैंऔर उनका सम्मान करते हैं।
(2) 07 राष्ट्रवाद 2. राष्ट्रवाद:- राष्ट्र कािी हद तक एक काल्पननक सम ुदाय हैजो अपने सदस्यों के साम ू हहक यकीन, इच्छाओं, कल्पनाओं विश्िास आहद के सहारे एक ्ागे में गहित होता है। यह क ु छ विशेष मान्यताओं पर आ्ाररत होता है जजन्हें लोग उस प ू णथ सम ुदाय के शलए बनाते हैंजजससे िह अपनी पहिान बनाए रखते हैं। राष्ट्र के ववषय मेंमान्यिाएं:- 1. साझेववश्वास:- एक राष्ट्र का आजस्तत्ि तभी बना रहता हैजब उसके सदस्यों को यह विश्िास हो कक िे एक - दसू रे के सार् है। 2. इतिहास:- व्यजतत अपने आपको एक राष्ट्र मानते हैंउनके अंदर अच्कतर स्र्ाई ऐनतहाशसक पहिान की भािना होती हैदेश की स्र्ायी पहिान का ढांिा पेश करने हेतु िे ककिंदनतयों, स्मन ृतयों तर्ा ऐनतहाशसक इमारतों तर्ा अशभलेखों की रिना के जररए स्ियं राष्ट्र के इनतहास के बो् की रिना करते हैं। 3. भ ू– क्षेत्र:- ककसी भ ूक्षेत्र पर कािी हद तक सार् – सार् रहना एिं उससे संबंच्त साझे अतीत की स्मन ृतयां जन सा्ारण को एक साम ू हहक पहिान का अन ु भाि कराती है। जैसे कोई इसे मातभ ृ श ू म या वपतभ ृ ू शम कहता हैतो कोई पवित्र भ ू शम। 4. सांझे राजनीतिक ववश्वास:- जब राष्ट्र के सदस्यों की इस विषय पर एक सांझा दृजष्ट्ि होती है कक िे कै से राज्य बनाना िाहते हैंशेष तथ्यों के अनतररतत िे ्मथ ननरपेक्षता, लोकतंत्र और उदारिाद जैसे म ू ल्यों और शसद्ांतों को स्िीकार करते हैंतब यह वििार राष्ट्र के रूप में उनकी राजनीनतक पहिान को स्पष्ट्ि करता है। 5. साझी राजनीतिक पहचान:- व्यजततयों को एक राष्ट्र में बां्ने के शलए एक समान भाषा, जातीय िंश परंपरा जैसी सांस्क ृ नतक पहिान भी आिश्यक है। ऐसे हमारे वििार, ्ाशमथक विश्िास, सामाजजक
(3) 07 राष्ट्रवाद परंपराए सांझे हो जाते हैं। िास्ति में लोकतंत्र में ककसी खास नस्ल, ्मथ या भाषा से संबद्ता की जगह एक म ू ल्य सम ूह के प्रनत ननष्ट्िा की आिश्यकता होती है। राष्ट्रवाद के मार्ग मेंआने वाली कठिनाइयााँ:- • सांप्रदानयकता • जानतिाद • क्षेत्रिाद • भाषािाद • नस्लिाद राष्ट्रवाद के दायरें (सीमाएं):- • क्षेत्रिाद • नैनतक म ू ल्यों का पतन • ्ाशमथक विवि्ता • आचर्थक विषमता • भाषायी विषमता राष्ट्रीय आत्म तनर्गय:- सामाजजक सम ूहों से राष्ट्र अपना शासन स्िंय करने और अपने भविष्ट्य को तय करने का अच्कार िाहते हैंदसू रे शब्दों मे िे आत्म ननणथय का अच्कार िाहते हैं। इस अच्कार के तहत राष्ट्र अंतराथष्ट्रीय सम ुदाय से मांग करता है कक शभन्न राजनीनतक इकाई या राज्य के दजेको मान्यता एंि स्िीक ृ नत दी जाएं। उन्नीसिीं सदी में यरू ोप में एक संस्क ृ नतः एक राज्य की मान्यता ने जोर पकड़ा। िलस्िरूप िसाथय की संच् के बाद विशभन्न छोिे एिं नि स्ितंत्र राज्यों का गिन हु आ। इस के कारण राज्यों की सीमाओं में भी पररितथन हु ए, बड़ी जनसंख्या का विस्र्ापन हु आ, कई लोग सांप्रदानयक हहंसा के भी शशकार हु ए।
(4) 07 राष्ट्रवाद इसशलए यह ननजश्ित करना म ु मककन नहीं हो पाया कक नि ननशमथत राज्यों में मात्र एक ही जानत के लोग रहें तयोंकक िहां एक से ज्यादा नस्ल और संस्क ृ नत के लोग रहते र्े । आश्ियथ की बात यह है कक उन राष्ट्र राज्यों ने जजन्होंने संघषों के बाद स्िा्ीनता प्राप्त की, ककंतु अब िे अपने भ ू– क्षेत्रों में राष्ट्रीय आत्म ननणथय के अच्कार की मांग करने िाले अल्पसंख्यक सम ूहों का खंडन करते है। आत्मतनर्गय के आंदोलनों से कै सेतनपटें :- समा्ान नए राज्यों के गिन में नहीं बजल्क ितथमान राज्यों को ज्यादा लोकतांब्रत्रक और समताम ू लक बनाने में है। समा्ान है कक शभन्न – शभन्न सांस्क ृ नतक और नस्लीय पहिानों के लोग देश में समान नागररक तर्ा शमत्रों की तरह सहअजस्तत्ि प ू िकथ रह सकें। राष्ट्रवाद िथा बह ु लवाद:- ” एक संस्क ृ नत – एक राज्य ” के वििार को त्यागने के बाद लोकतांब्रत्रक देशों ने सास्ं क ृ नतक रूप से अल्पसंख्यक सम ुदायों की पहिान को स्िीकार करने तर्ा सुरक्षक्षत करने के तरीकों की श ु रूआत की है। भारतीय संवि्ान में भाषायी, ्ाशमथक एंि सांस्क ृ नतक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के शलए व्यापक प्राि्ान हैं। यदयवप अल्पसंख्यक सम ूहों को मान्यता एिं सरंक्षण प्रदान करने के बािज ूद क ु छ सम ूह पर् ृ क राज्य की मांग पर अड़े रहें, ऐसा हो सकता है। यह विरो्ाभासी तथ्य होगा कक जहां िैजश्िक ग्राम की बातें िल रही हैंिहां अभी भी राष्ट्रीय आकांक्षाएं विशभन्न िगों और सम ुदायों को उदिेशलत कर रही है। इसके समा्ान के शलए संबंच्त देश को विशभन्न िगों के सार् उदारता एिं दक्षता का पररिय देना होगा सार् ही असहहष्ट्ण ु एक जातीय स्िरूपों के सार् किोरता से पेश आना होगा ।

Tài liệu liên quan

x
Báo cáo lỗi download
Nội dung báo cáo



Chất lượng file Download bị lỗi:
Họ tên:
Email:
Bình luận
Trong quá trình tải gặp lỗi, sự cố,.. hoặc có thắc mắc gì vui lòng để lại bình luận dưới đây. Xin cảm ơn.