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Content text 6. नियंत्रण एवं समन्वय.pdf


(1) ChemContent हुआ इसकेअंतर्म तसरेर्क पहुिँ जार्ा है| एक्सॉन केअंर् मेंतवद्यर्ु आवेग का पररवर्तन रासायतनक संकेर् मेंतकया जार्ा हैर्ातक यह आगेसंिाररर् हो सके| येरासायतनक संकेर् ररक्त स्थान या तसनेप्स (तसनेतप्टक दरार) को पार करर्े हैऔर अगली र्ंतत्रका कीिुतमका मेंइसी र्रह का तवद्यर्ु आवेग प्रारंभ करर्ेहैं| इस प्रकार सिूनाएंएक जगह सेदसूरी जगह संिाररर् हो जार्ी हैं| नसिेप्स :- दो र्ंतत्रका कोतशकाओंकेबीि मेंएक ररक्त स्थानपाया जार्ा हैइसेतसनेप्स (तसनेतप्टक दरार) कहर्ेहैं| प्रनतवती निया :- तकसीउद्दीपन केप्रतर्, मतस्र्ष्क केहस्र्क्षेप केतबना, अिानक अनतुिया, प्रतर्वर्ी तिया कहलार्ी हैयेतियाएँस्वर्: होनेवाली तियाएँहैजो जीव की इच्छा केतबना ही होर्ी है| उदाहिण: (i) तकसी गमतवस्र्ुको छूनेसेजलनेपर र्ुरंर् हाथ हटा लेना| (ii) खाना देखकर मँहु मेंपानी का आ जाना (iii) सईु िभुानेपरहाथ काहट जाना आतद| प्रनतवती नियाओंका नियंत्रण :- सभी प्रतर्वर्ी तियाएँमेरुरज्जूकेद्वारा तनयंतत्रर् होर्ी है ऐनछिक नियाएँ:- वेसभी तियाएँतजस पर हमारा तनयंत्रण होर्ा है, ऐतच्छक तियाएँकहलार्ी हैं| जैसे- बोलना, िलना, तलखना आतद| ऐनछिक नियाओंका नियंत्रण :-ऐतच्छक तियाएँहमारी इच्छा और सोंिनेसेहोर्ीहैइसतलएइसका तनयंत्रण हमारे सोिनेवाला भाग अग्र-मतस्र्ष्क केद्वारा होर्ा है| अिैनछिक नियाएँ:- वेसभी तियाएँजो स्वर्: होर्ी रहर्ी हैतजनपर हमारा कोई तनयंत्रण नहीं होर्ा है| अनैतच्छक तियाएँकहलार्ी है| जैसे: ह्रदय का धड़कना, साँस का लेना, भोजन का पिना आतद| अिैनछिक नियाओंका नियंत्रण :- अनैतच्छक तियाएँमध्य-मतस्र्ष्क व पश्च-मतस्र्ष्क केद्वारा तनयंतत्रर् होर्ी हैं| प्रनतवती चाप :- प्रतर्वर्ी तियाओंकेआगम संकेर्ोंपर्ा लगानेऔर तनगतम तियाओंकेकरनेकेतलए संवेदी र्ंतत्रका कोतशका और प्रेररर् र्ंतत्रका कोतशका मेरूरज्जुकेसाथ तमलकरएक पथ का तनमातण करर्ीहैतजसेप्रतर्वर्ी िाप कहर्े है|

(3) ChemContent कायय:- (i) येशरीर केसभी भागों सेसूिनाएँप्राप्त करर्ेहैंर्था इसका समाकलन करर्ेहै (ii) पेतशयों र्क सन्देश भेजर्ेहैं| (iii) मतस्र्ष्क हमेंसोिनेकी अनमुतर् र्था सोिनेपर आधाररर् तिया करनेकी अनमुतर् प्रदान करर्ा है। (iv) सभी प्रतर्वर्ी तियाएंमेरुरज्जुकेद्वारा तनयंतत्रर् होर्ी हैं| (v) सभीऐतच्छक एवंअनैतच्छक तियाएँमतस्र्ष्क द्वारा तनयंतत्रर् होर्ी हैं| िे नियम :- मानव खोपड़ी का वह भाग जो मतस्र्ष्क को सरुक्षा प्रदान करर्ा है, तजसमेंमनष्ुय का तदमाग तस्थर् रहर्ा है| मनततष्क आविण :- मतस्र्ष्क आवरण र्ीन पर्ली तितल्लयों सेबना एक आवरण हैजो मानव मतस्र्ष्क को आंर्ररक अघार् सेसुरक्षा प्रदान करर्ाहैं| इसकेअंदरएक र्रल पदाथतसेभरा रहर्ाहैतजसेसेररब्रो स्पाइनल फ्लडू कहर्ेहैं| यह मतस्र्ष्क सेमेरुरज्जुर्क िै ला रहर्ा है| सेरिब्रो तपाइिल फ्लूड :- यह मतस्र्ष्क आवरण केदो परर्ों केबीि मेंपाया जानेवाला एक र्रल पदाथतहैजो मतस्र्ष्क को आंर्ररक अघार् सेसरुक्षा प्रदान करर्ा हैऔर मतस्र्ष्क आवरणशोथ सेबिार्ाहै मनततष्क केभाग औि उिकेकायय:- 1. अग्र मनततष्क :- यह सोंिनेवाला मख्ुय भाग है। इसमें' तवतभन्न ग्रातहयों सेसंवेदी आवेग प्राप्त करनेकेक्षेत्र होर्ेहैं। इसमेंसनुने, देखनेऔर सँघूनेकेतलए तवशेष भाग होर्ेहैंयह ऐतच्छक पेतशयों केगतर् को तनयंतत्रर् करर्ाहै। इसमेंभूख सेसंबंतधर् के न्ि है। 2. मध्य मनततष्क :- यह शरीर केसभी अनैतच्छक तियाओंको तनयंतत्रर् करर्ा है। 3. पश्च मनततष्क :- यह भी अनैतच्छक तियाओंको तनयंतत्रर् करर्ा है। सभी अनैतच्छक तियाएँजैसेरक्तदाब, लार आना र्था वमन पश्चमतस्र्ष्क तस्थर् मेडुला द्वारा तनयंतत्रर् होर्ी हैं। पश्च मतस्र्ष्क र्ीन के न्िों सेतमलकर बना है|

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