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Content text 12. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव.pdf

विद्य ु त धारा केच ुुंबकीय प्रभाि च ु म्बक केध्र ु व :- 1. उत्तर दिशा की ओर संकेत करनेवालेदसरेकोउत्तरोमख ु ी ध्रव ु अथवाउत्तर ध्रव ु कहतेहैं। 2. िस ू रा दसरा जो िदिण दिशा की ओर संकेत करता हैउसेिदिणोमख ु ी ध्रव ु अथवा िदिण ध्रव ु कहतेहैं। च ु म्बकीय क्षेत्र :-एक मैगनेट केचारों केिेत्रदजसमेंचम् ु बक कापता लगाया जा सकताहै, चम् ु बकीय िेत्र कहलाता है| च ु म्बकीय क्षेत्र रेखाएँ:- चम् ु बक केचारों ओर बहुत सी रेखाएँबनती हैं, जो चम् ु बक केउतारी ध्रव ु से दनकल कर िदिणी ध्रव ु मेंप्रवेश करती प्रतीत होती हैं, इन रेखाओंको चम् ु बकीय िेत्ररेखाएँकहतेहैं| च ु म्बकीय क्षेत्र रेखाओंकी ववशेषताएँ:- i. चम् ु बकीय िेत्ररेखाएँउत्तरी ध्रव ु सेदनकलकर िदिणी ध्रव ु मेंसमादहत हो जाती है| ii. चम् ु बक केअंिर, चम् ु बकीय िेत्र की दिशा इसकेिदिणी ध्रव ु सेउत्तरी ध्रव ु की ओरहोता है| iii. चम् ु बकीय िेत्ररेखाएँबंि वक्र होती हैं| iv. जहाँचम् ु बकीय िेत्ररेखाए घनी होती हैंवहाँचम् ु बकीय िेत्र मजबत ू होताहै| v. िो चम् ु बकीय िेत्ररेखाएँकभी एक िस ु रेको प्रदतच्छेि नहीं करती हैं| धारावाही चालक केचारो ओर च ु म्बकीय क्षेत्र :- i. एक धात ु चालक सेहोकर गज ु रनेवाली दवद्यत ु धारा इसकेचारों ओर चम् ु बकीय िेत्र बनाता है| ii. जब एक धारावाही चालक को दिक्सच ू क सईु केपास और उसकेसईु केसमांतर लेजातेहैतो दवद्यत ु धारा की बहाव की दिशा दिकसच ु क केदवचलन की दिशा को उत्क्क्रदमत कर िेता हैजो दक दवपरीत दिशा मेंहोता है| iii. यदि धारा मेंवदृि की जाती हैतो दिक्सच ू क केदवचलन मेंभी वदृि होतीहैं iv. जैसेजैसेचालन मेंधारा की वदृि होती हैवैसेवैसेदिए गए दबंि ु पर उत्क्पन्न चम् ु बकीय िेत्र का पररमाण भी बढ़ता है|
(1) ChemContent v. जब हम एक कंपास (दिक्सच ू क) को धारावाही चालक सेिर ू लेजातेहैंतो सईु का दवचलन कम हो जाता है| vi. तार मेंप्रवादहत दवद्यत ु धारा केपररमाण मेंवदृि होती हैतो दकसी दिए गए दबंि ु पर उत्क्पन्न चंब ु कीय िेत्र केपररमाण मेंभी वदृि हो जाती है। vii. दकसी चालक सेप्रवादहत की गई दवद्यत ु धरा केकारण उत्क्पन्न चंब ु कीय िेत्र चालक सेिर ू जाने पर घटता है। viii. जैसे-जैसेदवद्यत ु धरावाही सीधेचालक तार सेिर ू हटतेजातेहैं, उसकेचारों ओरउत्क्पन्न चंब ु कीय िेत्र को दनरूदपत करनेवालेसंकेंद्री वत्तृ ों का साइज़ बडा हो जाता है। दवक्षण हस्त अंग ु ष्ठ वियम :- कल्पना कीदजए दक आप अपनेिादहनेहाथ मेंदवद्यत ु धरावाही चालक को इस प्रकार पकडेहुए हैंदक आपका अँगठ ू ा दवद्यत ु धरा की दिशा की ओर संकेत करता है, तो आपकी अँगद ु लयाँचालक केचारों ओर चंब ु कीय िेत्र की िेत्र रेखाओंकी दिशा मेंदलपटी होंगी| इस दनयम को िदिण-हस्त अंगष्ठ ु दनयम कहतेहैं| इस दनयम को मैक्सवेल का कॉककस्क्र ू दनयम भी कहतेहैं| ववद्य ु त धरावाही वृत्ताकार पाश केकारण च ुंबकीय क्षेत्र :- दकसी दवद्यत ु धरावाही चालक केकारण उत्क्पन्न चंब ु कीय िेत्र उससेिर ू ी केव्यत्क् ु क्रम पर दनभकर करता है। इसी प्रकार दकसी दवद्यत ु धरावाही पाश के प्रत्क्येक दबंि ु पर उसकेचारों ओर उत्क्पन्न चंब ु कीय िेत्र को दनरूदपत करनेवालेसंकेंद्री वत्तृ ों का साइज़ तार सेिर ू जानेपर दनरंतर बडा होता जाता है। ववद्य ु त धरावाही वृत्ताकार पाश केकारण च ुंबकीय क्षेत्र का गण ु :- i. वत्तृ ाकारपाश केकें द्र पर इन बहृ त्वत्तृ ों केचाप सरल रेखाओंजैसेप्रतीत होनेलगतेहैं।
(2) ChemContent ii. दवद्यत ु धरावाही तार केप्रत्क्येक दबंि ु सेउत्क्पन्न चबंु कीय िेत्ररेखाएँपाश केकें द्र पर सरल रेखा जैसी प्रतीत होनेलगती हैं। iii. पाश केभीतर सभी चंब ु कीय िेत्ररेखाएँएक ही दिशा मेंहोती हैं • दकसी दवद्यत ु धरावाही तार केकारण दकसी दिए गएदबंि ु परउत्क्पन्न चंब ु कीय िेत्र प्रवादहत दवद्यत ु धरा पर अनल ु ोमत दनभकर करता है। • यदि हमारेपास n फे रों की कोई कंु डली हो तो उत्क्पन्न चंब ु कीय िेत्र पररमाण मेंएकल फे रों द्वारा उत्क्पन्न चबंु कीय िेत्र की तल ु ना मेंn गन ु ा अदधक प्रबल होगा। इसका कारण यह हैदक प्रत्क्येक फे रों मेंदवद्यत ु धारा केप्रवाह की दिशा समान है, अतः व्यदिगत फे रों केचंब ु कीय िेत्र संयोदजत हो जातेहैं। पररिावलका :- पास-पास दलपटेदवद्यत ु रोधी ताँबेके तार की बेलन की आकृदत की अनेक फे रों वाली कंु डली को पररनादलका कहतेहैं।

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