Content text 8. बल और गति का नियम.pdf
8. बल और गति का तियम बल और उसकेप्रकार बल (Force): बल एक प्रकार का धक्का या ख िंचाव हैखिसमेंखकसी वस्त ु की अवस्था मेंपररवततन करने की प्रवखृत होती है| द ु सरेशब्दों में: खकसी वस्त ु पर लगनेवालेधक्का, ख िंचाव या चोट को बल कहतेहै| इसमेंवस्त ु मेंगखत ला सकनेकी क्षमता होती है| बल का S.I मात्रक न्यट ू न (N) याkgm-2 है| यहएक सखिश राखश है| इसमेंपररमाण और खिशा िोनों होतेहैं| बल केकारण ही खकसी वस्त ु मेंगखत आती है| बल केप्रकार (Type of forces): 1. घर्षण बल (Friction force): यह वह बल हैिो खकसी वस्त ु की गखत की खिशा केखवपरीत खिशा में कायत करता है| यह िो सतहों के बीच कायत करता है| उिाहरण: (i) िब हम चलतेहैंतो यह बल हमारेचप्पल या ित ू ेऔर धरती केबीच कायतकरता ह|ै (ii) िब सड़क पर कोई कार िौड़ती है तो यह बल सड़क और कार के टायर के बीच कायत करता है| घर्तण बल को कम करना (Reducing the friction force): घर्तण बल को कम करने के खलए हम खनम्न चीिों का उपयोग करते हैं: (i) खचकनी गोली (Smooth marble) िैसे- चक्कों मेंबॉल बैररिंग काउपयोग (ii) खचकनी समतल (Smooth plane) (iii) समतल की सतहपर खचकनाई यक्त ु पिाथत(लख ु िकेंट) काउपयोग
(1) ChemContent 2. अभिके न्द्रीय बल (Centripital force): िब कोई वस्त ु वतृ ीय पथ पर गखत करता हैतोउसकेकेंद्र सेउस परएक बल लगताहैिोउसेप्रत्येक खबिंि ु पर केंद्र की ओर ींचताह|ैइस बल को अखिकेन्द्रीय बल कहते हैं| िैसे - सय ू तकेचारो ओर पथ्ृवी की गखत 3. च ु म्बकीय बल (Magnetic force): चम् ु बक द्वारा खकसी चम् ु बकीय धात ु पर लगाया गया बल चम् ु बकीय बल कहलाता ह|ैअथवा खवद्यत ु चम् ु बक द्वारा अपनेचारों फैलेचम् ु बकीय क्षेत्र मेंचम् ु बकीय धात ु द्वारा बल का अनि ु व करना| 4. ग ु रुत्वाकर्षण बल (Gravitational force): िो खपिंडो के बीच लगनेवालेबल को गरु ु त्वाकर्तण बल कहते है| िैसे - पथ्ृवी और सय ू तकेबीच लगनेवाला बल| बल की प्रबलता के आधार पर बल िो प्रकार के होते हैं| (i) सिंतख ु लत बल (Balanced force): खकसी वस्त ु पर लगनेवालेअनेक बलों का यखिपररणामी बल शन् ू य हो तो ऐसेबल को सिंतख ु लत बल कहतेह|ैं (ii) असिंतख ु लत बल (Unbalanaced force): खकसी वस्त ु पर लगनेवालेसिी बालों का पररणामी बल शन् ू य नहीं हैतो ऐसेबल को असिंतख ु लत बल कहतेह|ैं • यखिखकसी वस्त ु पर असतिं ख ु लत बल लगाया िाताहैतो वस्त ु की चाल मेंया तोउसकेगखत की खिशा में पररवततन होता है| • खकसी वस्त ु की गखत मेंत्वरण उत्पन्न करनेकेखलए असिंतख ु लत बल की आवश्यकता होती ह|ै • वस्त ु की चाल मेंपररवतनत तब तक बनी रहगेी िब तक वस्त ु पर असिंतख ु लत बल लग रहा ह|ै गखत केखनयम को प्रस्तत ु करनेका श्रेय महान वैज्ञाखनक सर आइिक न्य ू टन को िाता ह|ैइन्होनेनेगखत के तीन खनयम खिएखिसेन्यट ू न का गखत का खनयम कहा ह|ै
(2) ChemContent (1) गखत का प्रथम खनयम (The First Law of Motion) (2) गखत का खद्वतीय खनयम (The Second Law of Motion) (3) गखत का ततृ ीय खनयम (The Third Law of Motion) गभि का प्रथम भियम (जड़त्व) (1) गखत का प्रथम खनयम (The First Law of Motion): गखत केप्रथम खनयम केअनस ु ार: "प्रत्येक वस्त ु अपनी खस्थर अवस्था या सरल रे ा मेंएकसमान गखत की अवस्था मेंबनी रहती हैिब तक खक उस पर कोई बाहरी बल कायतरत न हो।" िस ु रेशब्िों में : सिी वस्तएुँअपनी अवस्था पररवततन का खवरोध करती ह|ैं • गखत के प्रथम खनयम सेहमेंयह पता चलता हैखक खकसी वस्त ु पर असिंतख ु लत बल लगानेसेगखत करता ह|ैअथातत खकसी वस्त ु पर असिंतख ु लत बल लगाया िाय तो यह बल केकारण गखत करता ह|ै • गखत का प्रथम खनयम यह बताता हैखक खकसी वस्त ु पर लगनेवाला असिंतख ु लत बाह्य बल उसकेवगे मेंपररवतनत करता हैऔर वस्त ु त्वररत हो िातीह|ै जड़त्व (Inertia): पररिार्ा (Definition): खकसी वस्त ु केखवरामावस्था मेंरहनेया समान वेग सेगखतशील रहनेकी प्रवखृि को िड़त्व कहते हैं। यही कारण है खक गखत के पहले खनयम को िड़त्व का खनयम िी कहते हैं। • िड़त्व प्रत्येक वस्त ु का गण ु या प्रवखृत ह|ै • िड़त्व को वस्त ु केद्रव्यमान सेमापा िाता ह|ै • इसका मात्रक खकलोग्राम (kg) होता है|