Content text Chapter 11 विश्व की जलवायु एवं जलवायु परिवर्तन.pdf
भूगोल अध्याय-11: विश्व की जलिायुएिं जलिायुपरििर्तन
(1) 12 विश्ि की जलिाय ु एिं जलिाय ुपरििर्तन जलिाय ु :- हमारा जीवन और हमारी आर्थिक क्रियाएं (जैसे- क ृ षि, व्यापार, उद्योग आदि) सभी जलवाय ु से प्रभाषवत और कभी – कभी ननयंत्रित भी होती है। जलिाय ु का िर्गीकिण:- 1. जलवाय ु का सबसे पहला वगीकरण य ू नाननयों ने क्रकया था। 2. जलवाय ुवगीकरण के तीन आधार हैं:- • आन ु भषवक (empirical) • जनननक Genetic • व्यवहाररक Applied या क्रियात्मक। 3. जलवाय ु लम्बे समय (कम से कम 30 विि) की िैननक मौसमी िशाओं का माध्य अथवा औसत है। भ ू मध्य सार्गिीय जलिाय ु :- भ ू मध्य सागरीय जलवाय ु(Cs) 30° से 40° अक्ांशों के मध्य उपोष्ण कदिबंध तक महाद्वीपों के पश्चिमी ति के साथ – साथ पाई जाती है। कोपेन का जलिाय ुिर्गीकिण:- 1. कोपेन का जलवाय ुवगीकरण (1918) जनननक और आन ु भषवक है। कोपेन ने जलवाय ु का वगीकरण तापमान तथा वििण के आधार पर क्रकया। थानिवेि ने वििण प्रभाषवता, तापीय िक्ता और संभाव्य ताष्पोत्सजिन को अपनेजलवाय ुवगीकरण का आधार बनाया। 2. कोपेन ने वनस्पनत के षवतरण तथा जलवाय ु मध्य एक घननष्ठ संबंध की पहिान की। उन्होंनेतापमान तथा वििण के क ु छ ननश्चित मानों का ियन करते हु ए उनका वनस्पनत के षवतरण से संबंध स्थाषपत क्रकया और इन मानों का उपयोग जलवाय ु के वगीकरण के ललए क्रकया। 3. कोपेन के अन ुसार जलवाय ुसम ूह:- • श ु ष्क
(2) 12 विश्ि की जलिाय ु एिं जलिाय ुपरििर्तन • कोष्ण शीतोष्ण • शीतल दहम – वन • शीत • उष्ण कदिबन्धीय आर्द्ि • उच्ि भ ू लम 4. कोपेन ने बडे तथा छोिे अक्रों के प्रयोग का आरंभ जलवाय ु के सम ूहों एवं प्रकारों की पहिान करनेके ललए क्रकया। सन्1918 में षवकलसत तथा समय के साथ संशोर्धत हुई कोपेन की यह पद्धनत आज भी लोकषप्रय और प्रिललत है। 5. कोपेन ने पााँि प्रमख ु जलवाय ुसम ूह ननधािररत क्रकए, श्जनमें से िार तापमान पर तथा एक वििण पर आधाररत है। 6. कोपेन ने बडे अक्र A, C, D तथा E से आर्द्ि जलवाय ु को और अक्र B से शष् ु क जलवाय ु को ननरूषपत क्रकया है। जलवाय ु सम ूहों को तापिम एवं विाि की मौसमी षवशेिताओं के आधार पर कई छोिी – छोिी इकाइयों में षवभाश्जत क्रकया गया हैतथा छोिे अक्रों के माध्यम से अलभदहत क्रकया गया है। कोपेन के उष्ण कटिबंधीय जलिाय ु :- कोपेन के उष्ण कदिबंधीय जलवाय ु को तीन प्रकारों में बााँिा जाता है, श्जनके नाम हैं:- • Af उष्ण कदिबंधीय आर्द्ि जलवाय ु • Am उष्ण कदिबंधीय मानसू न जलवाय ु • Aw उष्ण कदिबंधीय आर्द्ि जलवाय,ु श्जसमें शीत ऋतु श ु ष्क होती है। (Am) उष्ण कटिबंधीय मानसू न, लघ ु श ु ष्क ऋर्ु :- 1. ये पवनें ग्रीष्म ऋतु में भारी विाि करती है। 2. शीत ऋतु प्रायः श ु ष्क होती है। 3. यह जलवाय ु भारतीय उपमहाद्वीप, िक्षक्णी अमेरीका के उत्तर – प ू वी भाग तथा उत्तरी आस्रेललया में पाई जाती है। (Aw) ए डब्ल्य ू उष्ण कटिबन्धीय आर्द्त एंि श ु ष्क जलिाय ु :-
(3) 12 विश्ि की जलिाय ु एिं जलिाय ुपरििर्तन 1. इस प्रकार की जलवाय ु में विाि बहु त कम होती है। 2. इस जलवाय ु में श ु ष्क ऋतु लम्बी एंव कठोर होती है। 3. श ु ष्क ऋतु में प्रायः अकाल पड जाता है। 4. इस प्रकार की जलवाय ु वाले क्ेिों में पणिपाती वन तथा पेडो से ढ़की घास भ ू लमयााँपाई जाती है। उष्ण कटिबंधीय आर्द्त जलिाय ु :- 1. उष्ण कदिबंधीय आर्द्ि जलवाय ु षवि ु वत वतृ के ननकि पाई जाती है। इस जलवाय ु के प्रम ु ख क्ेि िक्षक्ण अमेररका का आमेजन बेलसन, पश्चिमी षवि ु वतीय अफ्रीका तथा िक्षक्णी प ू वी एलशया के द्वीप हैं। विि के प्रत्येक माह में िोपहर के बाि गरज और बौछारों के साथ प्रि ुर मािा में विाि होती है। 2. षवि ु वतीय प्रिेश में तापमान समान रूप से ऊाँ िा तथा वाषििक तापांतर नगण्य होता है। क्रकसी भी दिन ज़्यािातर तापमान 30° सेश्ससयस और न्य ू नतम तापमान 20° सेश्ससयस होता है। उष्ण कटिबंधीय मानसू न जलिाय: ु- उष्ण कदिबंधीय मानसू न जलवाय ुभारतीय उपमहाद्वीप, िक्षक्ण अमेररका के उत्तर – प ू वी भाग तथा उत्तरी ऑस्रेललया में लमलती है। भारी विाि ज़्यािातर गलमियों में ही होती है। शीत ऋतु श ु ष्क होती है। श ु ष्क जलिाय: ु- श ु ष्क जलवाय ु की षवशेिता अत्यंत न्य ू न विाि हैजो पािपों के षवकास हेतुकाफी नहीं होती। यह जलवाय ु पथ् ृ वी के बहु त बडे भाग पर लमलती हैजो षवि ु वत वतृ से 15° से 60° उत्तर व िक्षक्ण अक्ांशों के मध्य प्रवादहत होती है। मरूस्थलीय जलिाय ु :- 1. अर्धकतर उष्ण कदिबंधीय वास्तषवक मरूस्थल िोनों गोलाद्िध में 15° तथा 60° अक्ाशों के मध्य षवस्ततृ हैं।