Content text 6. नियंत्रण एवं समन्वय.pdf
विज्ञान अध्याय-6: ननयंत्रण एिं समन्वय
(1) नियंत्रण एवंसमन्वय 06 परिचय :- संसार के सभी जीव अपनेआस - पास होनेवालेपररवर्तनों के प्रतर्-अनुक्रिया करर्े है| पयातवरण मेंप्रत्येक पररवर्तन की अनुक्रिया सेएक समुचिर् गतर् उत्पन्न होर्ी है| कोई भी गतर् उस घटना पर तनभतर करर्ी हैजो उसेप्रेररर् करर्ी है| जैसे- हम गरम वस्तुको छूटेहैंर्ो हमारा हाथ जलनेलगर्ा हैऔर हम र्ुरंर् इसके प्रतर् अनुक्रिया करर्ेहै| जंतुओ ंमेंननयंत्रण एिंसमन्वय :- जंर्ुओ ंमेंतनयंत्रण एवं समन्वय र्ंत्रत्रका र्था पेशी उत्तक द्वारा क्रकया जार्ा है| ग्राही :- र्ंत्रत्रका कोशशकाओ ंके ववशशष्ट ससरेजो पयातवरण सेसभी सूिनाओ ंका पर्ा लगार्ेहैंग्राही कहलार्ेहैं| ग्राहहयों के प्रकाि :- ग्राही तनम्न प्रकार के होर्ेहैं (i) प्रकाश ग्राही ----> दृत्रष्ट के शलए (आँख) (ii) श्रावण ग्राही ----> सुननेके शलए (कान) (iii) रस संवेदी ग्राही ---> स्वाद के शलए (जीभ) (iv) घ्राण ग्राही ---> सूंघनेके शलए (नाक) (v) स्पशतग्राही ---> ऊष्मा को महसूस करनेके शलए (त्विा) येसभी ग्राही हमारेज्ञानेन्द्रियों मेंस्थिर् होर्ेहैं| तंवत्रका ऊतक :- र्ंत्रत्रका उत्तक र्ंत्रत्रका कोशशकाओ ंया न्यूरॉन के इक संगठिर् जाल का बना हुआ होर्ा हैऔर यह सूिनाओ ं के ववद्युर् आवेग के द्वारा शरीर के एक भाग सेदसु रेभाग र्क संवहन के शलए ववशशष्टीकृ र् हैं|
(2) नियंत्रण एवंसमन्वय 06 तंवत्रका कोशिका के भाग :- (i) द्रम ु ाकृवतक ससिा (द्रस ु मका) :- जहाँसूिनाएँउपार्जजर् की जार्ी है| (ii) द्रस ु मका सेकोशिकाय तक :- शजससेहोकर सूिनाएँववद्युर् आवेग की र्रह यात्रा करर्ी हैं| (iii) एक्सॉन :- जहाँइस आवेग का पररवर्तन रासायतनक संके र् मेंक्रकया जार्ा हैशजससेयह आगेसंिाररर् हो सके| तंवत्रकाओ ंद्वािा सूचनाओ ंका संचिण :- सभी सूिनाएँजो हमारेमस्थस्तष्क र्क जो पहुँिार्ी हैंये सूिनाएँएक र्ंत्रत्रका कोशशका के द्रमु ाकृतर्क ससरेद्वारा उपार्जजर् (aquaired) की जार्ी है, और एक रासायतनक क्रिया द्वारा एक ववद्युर् आवेग पैदा करर्ी हैं| यह आवेग द्रचुमका सेकोशशकाकाय र्क जार्ा हैक्रिर र्ब र्ंत्रत्रकाक्ष (एक्सॉन ) मेंहोर्ा हुआ इसके अंतर्म ससरेर्क पहुँि जार्ा है| एक्सॉन के अंर् मेंववद्युर् आवेग का पररवर्तन रासायतनक संके र् मेंक्रकया जार्ा हैर्ाक्रक यह आगे संिाररर् हो सके| येरासायतनक संके र् ररक्त िान या ससनेप्स (ससनेशिक दरार) को पार करर्ेहै और अगली र्ंत्रत्रका की द्रचुमका मेंइसी र्रह का ववद्युर् आवेग प्रारंभ करर्ेहैं| इस प्रकार सूिनाएं एक जगह सेदूसरी जगह संिाररर् हो जार्ी हैं| ससनेप्स :- दो र्ंत्रत्रका कोशशकाओ ंके बीि मेंएक ररक्त िान पाया जार्ा हैइसेससनेप्स (ससनेशिक दरार) कहर्ेहैं|