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Content text 5. यूक्लिड की ज्यामिति का परिचय.pdf

यूक्लिड की ज्याक्िक्ि शब्द ज्यामिमि (Geometry) ग्रीक शब्द "मियो"(Geo) से आया है, मिसका अर्थहै"पथ्ृवी", और "िेट्रॉन",(Metron) मिसका अर्थहै"िापना"। यमूलिमियन ज्यामिमि एक गमििीय प्रिािी हैमिसका श्रेय मिस्र िेंअिेलिेंमिया िेंगमिि केमशक्षक यमूलिि को मदया िािा ह।ै यमूलिि नेहिेंअपनी पस्ुिक "एमििेंट्स" िेंज्यामिमि की बमुनयादी अवधारिाओंकेबारेिेंएक असाधारि मवचार मदया। यमूलिि नेिहसूस मकया मक ज्यामिमि का सटीक मवकास नींव सेशरूु होना चामहए। ज्यामिमि की बेहिर सिझ के मिए यमूलिि केअमिगहृ ीिों और अमिधारिाओंका अिी िी अध्ययन मकया िािा ह।ै यमूलिमियन ज्यामिमि ज्यामििीय आकृमियों (िि और ठोस) और मवमिन्न स्वयंमसद्धों और प्रिेयों पर आधाररि आकृमियों का अध्ययन ह।ैयह ििू रूप सेसििि सिहों केमिए पेश मकया गया ह।ै यमूलिमियन ज्यामिमि को मवशेष रूप सेज्यामििीय आकृमियों और मविानों केआकार केमिए बेहिर ढंग सेसिझाया गया ह।ै ज्यामिमि केइस िाग का प्रयोग यनूानी गमििज्ञ यमूलिि नेमकया र्ा, मिन्होंनेइसका विथन अपनी पस्ुिक एमििेंट्स िेंिी मकया ह।ै इसमिए, इस ज्यामिमि को यमूलिि ज्यामिमि िी कहा िािा ह।ै अमिगहृ ीि या अमिधारिाएँऐसी िान्यिाएँहैंिो स्पष्ट सावथिौमिक सत्य ह, ैंवेमसद्ध नहीं होिी ह।ैंयमूलिि नेअपनी पस्ुिक केित्वों िेंज्यामिमि केििू मसद्धांिों िैसेज्यामििीय आकृमियों और आकृमियों कापररचय मदयाहैऔर5 िख्ुय स्वयंमसद्ध या अमिधारिाएँ बिाई ह।ैंयहां, हि यमूलिमियन ज्यामिमि की पररिाषा, इसके ित्वों, अमिगहृ ीिों और पांच िहत्वपिूथअमिधारिाओंपर चचाथकरने िा रहे हैं। यूक्लिड की परिभाषाएँ, अक्भगृहीत औि अक्भधािणाएँ यक्ूलिड नेइन कथनों को संक्िप्त रूप सेपरिभाषाओंकेरूप मेंप्रस्ततु क्कया। उन्होंनेअपनेइन िहस्योदघाटनों का प्रािम्भ ‘एिीमेंट्स’ की पस्ुतक 1 में23 परिभाषाएँदेकि क्कया। इनमेंसेकुछ परिभाषाएँनीचेदी जा िही ह ैंः परिभाषाएँ 1. एक क् ंदुवह हैक्जसका कोई भाग नहीं होता। 2. एक िेखा चौडाई िक्हत िम् ाई होती है। 3. एक िेखा केक्सिेक् ंदुहोतेह । 4. एक सीधी िेखा ऐसी िेखा हैजो स्वयंपि क् ंदओु ंकेसाथ सपाट रूप सेक्स्थत होती है। 5. एक पष्ठृ वह हैक्जसकी के वि िम् ाई औि चौडाई होती है। 6. पष्ठृ केक्कनािेिेखाएँहोती ह । 7. एक समति पष्ठृ ऐसा पष्ठृ हैजो स्वयंपि सीधी िेखाओंकेसाथ सपाट रूप सेक्स्थत होता है। अक्भगृहीत 1) यक्ूलिड केकुछ अक्भगहृ ीतों को, क् ना उनकेद्वािा क्दए क्रम के, नीचेक्दया जा िहा हैैंः 2) वेवस्तएुँजो एक ही वस्तुके िा ि हों एक दसूिेके िा िहोती ह । 3) यक्द िा िों को िा िों मेंजोडा जाए, तो पर्ूणभी िा ि होतेह ।
(1) 4) यक्द िा िों को िा िों मेंसेघटाया जाए, तो शेषफि भी िा ि होतेह । 5) वेवस्तएुँजो पिस्पि संपाती हों, एक दसूिेके िा ि होती ह । 6) पर्ूणअपनेभाग से डा होता है। 7) एक ही वस्तओु ंकेदगुनुेपिस्पि िा ि होतेह । 8) एक ही वस्तओु ंकेआधेपिस्पि िा ि होतेह । प्रमेय 5.1: दो क्भन्न िेखाओंमेंएक सेअक्धक क् ंदुउभयक्नष्ठ नहीं हो सकता। उपपक्ि यहाँ, हमेंदो िेखाएँl औि m दी हुई ह । हमेंयह क्सद्ध किना हैक्क l औि m मेंके वि एक क् ंदुउभयक्नष्ठ है। थोडेसमय केक्िए, यह मान िीक्जए क्क येदो िेखाएँदो क्भन्न क् ंदओु ंP औि Q पि प्रक्तच्छेद किती ह । इस प्रकाि, दो क्भन्न क् ंदओु ंP औि Q सेहोकि जानेवािी आपकेपास दो िेखाएँl औि m हो जाती ह । पिन्तुयह कथन अक्भगहृ ीत 5-1 केक्वरुद्ध है, क्जसकेअनसुाि दो क्भन्न क् ंदओु ंसेहोकिएक अक्द्वतीय िेखा खींची जा सकती है। अतैंः, हम क्जस कल्पना सेचिे थेक्क दो िेखाएँदो क्भन्न क् ंदओु ंसेहोकि जाती ह गित है। इससेयह क्नष्कषणक्नकिता हैक्क दो क्भन्न िेखाओंमेंएक सेअक्धक क् ंदुउभयक्नष्ठ नहीं होगा। हि सक्हत उदाहिण यक्द A, B औि C एक िेखापि क्स्थत तीनक् ंदुह औि B क् ंदओु ंA औि B के ीच मेंक्स्थत हैतो क्सद्ध कीक्जएक्क AB + BC = AC है। हि: AB + BC केसाथ AC संपाती है। साथ ही, यक्ूलिड का अक्भगहृ ीत (4) कहताहैक्क वेवस्तएुँजोपिस्पि संपातीहोंएक दसूिेके िा िहोतीह । अतैंः, यहक्सद्ध क्कया जा सकता हैक्क AB + BC = AC है। ध्यान दीक्जए क्क इस हि मेंयह मान क्िया गया हैक्क दो क् ंदओु ंसेहोकि एक अक्द्वतीय िेखा खींची जा सकती है। यूक्लिड की अक्भधािणाएँ यक्ूलिड की पाँच अक्भधािर्ायेंइस प्रकाि ह ैंः अक्भधािणा 1: एक क् ंदुसेएक अन्य क् ंदुतक एक सीधी िेखा खींची जा सकती है। यह अक्भधािर्ा हमें ताती हैक्क दो क्भन्न क् ंदओु ंसेहोकि कम सेकम एक िेखा अवश्य खींची जा सकती है। अक्भधािणा 2: एक सांत िेखा को अक्नक्ित रूप से ढाया जा सकता है। ध्यानदीक्जएक्जसकोहम आजकि िेखाखंड कहतेह , उसेयक्ूलिड नेसांत िेखा कहा था।अतैंः, वतणमान की भाषा में, दसूिीअक्भधािर्ा यह कहती हैक्क एक िेखाखंड को दोनों ओि क्वस्ततृ किकेएक िेखा नाई जा सकती है।
(2) अक्भधािणा 3: क्कसी को के न्र मान कि औि क्कसी क्िज्या सेएक वत्तृ खींचा जा सकता है। अक्भधािणा 4: सभी समकोर् एक दसूिेके िा ि होतेह । अक्भधािणा 5: यक्दएक सीधी िेखादो सीधी िेखाओंपि क्गि कि अपनेएक ही ओिदो अंतैंः कोर् इस प्रकाि नाएक्क इनदोनों कोर्ों का योग क्मि कि दो समकोर्ों सेकम हो, तो वेदोनों सीधी िेखाएँअक्नक्ित रूप से ढाए जानेपि उसी ओि क्मिती ह क्जस ओि यह योग दो समकोर्ों सेकम होता है। यूक्लिड की पाँचवीं अक्भधािणा केसमतुल्य रूपान्तिण गक्र्त केइक्तहास मेंयक्ूलिड की पाँचवीं अक्भधािर्ा का अत्याक्धक महत्व है। इस अक्भधािर्ा केपरिर्ामस्वरूप यक्द दो िेखाओं पि क्गिनेवािी िेखा केएक ही ओि केदोनों अंतैंः कोर्ों का योग 1800 हो, तो दोनों िेखाएँकभी भी प्रक्तच्छेद नहीं कि सकतीं। यूक्लिड ज्याक्िक्ि का इक्िहास हड़प्पा और िोहनिो-दारो िेंखदुाई मसंधुघाटी सभ्यिा (िगिग 3300-1300ईसा पवूथ) केअत्यंि समुनयोमिि शहरों को दशाथिी है। मिस्रवामसयों द्वारा मपरामििों का मनदोष मनिाथि उस सिय के िोगों द्वारा उपयोग की िाने वािी ज्यामििीय िकनीकों के व्यापक उपयोग का एक और उदाहरि है। िारि िें, सिु बा सत्रू, ज्यामिमि पर पाठ्यपस्ुिकेंदशाथिी हैंमक िारिीय वैमदक काि िेंज्यामिमि की परंपरा र्ी। ज्यामिमि का मवकास धीरे-धीरे हो रहा र्ा, िब मिस्र केअिेलिेंमिया िेंगमिि केमशक्षक यमूलिि नेज्यामिमि िेंइनिेंसेअमधकांश मवकासों को एकत्रमकया और इसेअपनेप्रमसद्ध ग्रंर् िेंसंकमिि मकया, मिसे उन्होंने 'एमििेंट्स' नाि मदया। सििि ज्याक्िक्ि ठोस ज्याक्िक्ि 1. मत्रििुों की सवाांगसििा 2. मत्रििुों की सिानिा 3. क्षेत्र 4. पाइर्ागोरस प्रिेय 5. िंिमियां 6. मनयमिि बहुििु 7. शांकव खंि 1. आयिन 2. मनयमिि ठोस

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