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सामाजिक विज्ञान (नागरिक शास्त्र) अध्याय-2: संविधान वनर्ााण
(1) 02 संविधान ननमााण संविधान:- संविधान लिखित ननयमों की एक ऐसी ककताब हैलिसेककसी देश मेंरहनेिािेिोग सामूहहक रूप सेमानतेहै। संविधान सिोच्च कानून है। संविधान िोगों के बीच आपसी सम्बन्ध तथा िोंगों और सरकार के बीच के सम्बन्ध तय करता है। रंगभेद:- रंगभेद नस्ली भेदभाि पर आधाररत उस व्यिस्था का नाम हैिो दलिण अफ्रीका मेंविलशष्ट तौर पर चिायी गई, दलिण अफ्रीका पर यह व्यिस्था यूरोप के गोरेिोगों नेिादी थी। दक्षिण अफ्रीका मेंरंगभेद:- 17िी ओर 18िी शताव्दी मेंव्यापार करनेआई यूरोप की कम्पननयों नेदलिण अफ्रीका को गुिाम बनाया और काफी बडी संख्या मेंयहााँगोरेिोग बस गए और यहााँके स्थानीय कािी चमडी िािे िोगों के साथ रंगभेद शुरू कर कदया।
(2) 02 संविधान ननमााण रंगभेद की नीवि के अंिगगि अश्वेिों पर प्रविबंध:- ➢ गोरो की बस्तियों मेंबसनेकी इिाित नहींथी। ➢ परममट होनेपर ही िहााँकाम करनेिा सकतेहैं। ➢ कािेिोग गोरों के लिए आरलित स्थानों पर नहींिा सकतेथे। इसमेंगोरों के मगरिाघर भी सस्तिलित थे। ➢ अश्वेतों को संगठन बनानेऔर इस भेदभािपूणणव्यिहार का विरोध करनेका भी अमधकार न था। दक्षिण अफ्रीका का स्विंत्रिा संग्राम:- अफ्रीकी नेशनि कांग्रेस के झंडेतिेदलिण अकफ्रककयों ने1950 सेही गोरों के विरुद्ध आिादी की िडाई िडी, आखिरकार 26 अप्रैि 1994 को दलिण अफ्रीका गणराज्य का नया झंडा िहराया और यह एक िोकतांत्रिक देश बन गया। ➢ यूरोपीय अल्पसंख्यक गोरों की सरकार स्थानीय कािेिोगों पर अत्याचार करती रहीं। ➢ दलिण अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेिा नेरंगभेद सेचिनेिािी शासन की व्यिस्था के विरुद्ध आिाि उठाई। ➢ अफ्रीकी नेशनि कांग्रेस के झंडेतिेगोरों के विरुद्ध मिदूर संघटन और कम्यूननस्ट पाटीीभी शाममि। ➢ 1994 मेंचुनाि की घोषणा की गई लिसमेंिोकप्रप्रय अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेिा की िीत हुई, उन्हेंस्वतंि दलिण अफ्रीका का पहिा राष्टरपनत चुना गया। नेल्सन मंडेला पर मुकदमा:- ➢ नेल्सन मंडेिा पर देशद्रोह के आधार पर मुकदमा चिाया गया। ➢ नेल्सन मंडेिा को 7 अन्य नेताओं सहहत 1964 मेंदेश मेंरंगभेद सेचिनेिािी शासन व्यिस्था का विरोध करनेके लिए आिीिन कारािास की सिा दी गई, िह 28 िषों तक दलिण अफ्रीका की सबसेभयािह िेि, रोब्बेन द्वीप की िेि मेंरहे।
(3) 02 संविधान ननमााण नेल्सन मंडेला द्वारा क्षलखिि आत्मकथा:- नेल्सन मंडेिा द्वारा लिखित आत्मकथा का नाम ‘ द िांग िॉक टूफ्रीडम ‘ है। अफ्रीका का संविधान:- अफ्रीका का संविधान इनतहास और भविष्य दोनों की बातेंकरता है। एक तरफ तो यह एक पविि समझौता हैकक दलिण अफ्रीकी के रूप मेंहम एक दूसरेसेयह िादा करतेहैंकक हम अपनेरंग भेिी क्रू र और दमनकारी इनतहास को कफर सेदोहरानेकी अनुमनत नहींदेंगे। ➢ यह अपनेदेश को इसके सभी िोगों द्वारा िािविक अथों मेंसाझा करनेका घोषणा पि भी है। श्वेत और अश्वेत, स्त्री और पुरुष यह देश पूणणरूप सेहम सभी का है। ➢ 2 िषों की चचाणऔर बहस के बाद 1994 तक लिस देश की दनुनया भर मेंिोकतांत्रिक तौर – तरीकों के लिए ननिंदा की िाती थी, आि उसेिोकतंि के मॉडि के रूप मेंदेिा िाता है। संविधान की आिश्यकिा:- ➢ िोकतान्त्रिक सरकार का ननमाणण और उसके कायणतय करनेके लिए। ➢ सरकार के विमभन्न अंगो के अमधकार िेि तय करनेके लिए। ➢ सरकार को अपनी शक्तियों के दरूु पयोग सेरोकनेके लिए। ➢ नागररकों के अमधकार सुरलित करनेके लिए। ➢ अच्छेसमाि के गठन के लिए। संविधान के प्रमुि कार्ग:- ➢ साथ रह रहेविमभन्न तरह के िोगों के बीच िरूरी भरोसा और सहयोग विकससत करना। ➢ स्पष्ट करना की सरकार का गठन कै सेहोगा और ककसेफै सिेिेनेका अमधकार होगा। ➢ सरकार के अमधकारों की सीमा तय करना और नागररकों के अमधकार बताना। ➢ अच्छेसमाि के गठन के लिए िोगों की आकांिाओंको व्यि करना। भारिीर् संविधान का ननमागण:-